करुणानिधि के निधन पर बिहार में राजकीय शोक की घोषणा, 2 दिनों तक सारे सरकारी कार्यक्रम बंद

  1. NEW DELHI: डीएमके प्रमुख और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि के निधन से देश भर में दुख का माहौल है। इसका असर बिहार में भी देखने को मिल रहा है। डीएमके प्रमुख के निधन पर बिहार में दो दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की गई है।

करुणानिधि के निधन के शोक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 8 और 9 अगस्त के सारे सरकारी कार्यक्रम रद्द कर दिया है। आपको बता दें कि बीते मंगलवार की शाम डीएमके प्रमुख करुणानिधि ने अपनी आंखें मूंद लीं। पूरा देश एक उनके निधन के शोक में डूबा है। देश भर में उनसे जुड़ी किस्से कहानियों की चर्चा हो रही है। आइये जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कई अहम और रोचक बातें।

 

करुणानिधि का पूरा नाम मुत्तुवेल करुणानिधि है। इनका जन्म 3 जून 1924 को ब्रिटिश भारत के नागपट्टिनम में हुआ था। वे इसाई वेल्लालर समुदाय से संबंध रखते थे। अपने गुरु और जस्टिस पार्टी के नेता अलगिरिस्वामी के एक भाषण से प्रेरित होकर करुणानिधि ने 14 साल की उम्र में राजनीति में प्रवेश किया और हिंदी विरोधी आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

कल्लाकुडी में हिंदी के विरोध प्रदर्शन ने तमिल राजनीति में उनकी भागीदारी को मजबूत किया। कल्लाकुडी को उस समय उत्तर भारत के एक शक्तिशाली राजा के नाम पर डालमियापुरम कहा जाता था। अपने विरोध प्रदर्शन के दौरान करूणानिधि और उनके साथियों ने रेलवे स्टेशन से हिंदी नाम को मिटा दिया और रेलगाड़ियों के मार्ग को अवरुद्ध करने के लिए पटरी पर लेट गए। इस विरोध प्रदर्शन में दो लोगों की मौत हो गई और करूणानिधि को गिरफ्तार कर लिया गया।

करूणानिधि पहली बार 1957 में तमिलनाडु विधानसभा के लिए चुने गए। 1961 में वे डीएमके के कोषाध्यक्ष बने और 1962 में राज्य विधानसभा में विपक्ष के उपनेता बने।1967 में डीएमके के सत्ता में आने के बाद वे सार्वजनिक कार्य मंत्री बने। 1969 में अन्नादुरई की मौत हो गई तब करूणानिधि को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनाया गया।

तमिलनाडु की राजनीति में अपने लंबे करियर के दौरान वे पार्टी और सरकार में विभिन्न पदों पर रह चुके हैं। 2006 के चुनाव में जे. जयललिता को हराने के बाद उन्होंने फिर से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री का पदभार संभाला। तमिलनाडु विधानसभा में उन्हें 11 बार निर्वाचित किया गया है।

करुणानिधि का साहित्य से गहरा लगाव रहा है।तमिल भाषा में उन्होंने कई कविताएं, उपन्यास, नाटक, गाने और संवाद लिखे हैं। उनकी लिखी किताबों में रोमपुरी पांडियन, तेनपांडि सिंगम, वेल्लीकिलमई, नेंजुकू नीदि, इनियावई इरुपद, संग तमिल शामिल है।

करुणानिधि ने तमिल फिल्म उद्योग में एक पटकथा लेखक के रूप में अपने करियर का शुभारंभ किया। वे ऐतिहासिक और सामाजिक (सुधारवादी) कहानियां लिखने के लिए मशहूर थे। इनकी फिल्मों का जमकर विरोध भी किया गया। उनकी विवादास्पद फिल्मों में पनाम और थंगारथनम का नाम शामिल है।

करुणानिधि का विवादों से पुराना रिश्ता रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनकी सरकार को भ्रष्टाचार का हवाला देते हुए बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद 2001 में उन्हें और उनकी पार्टी के कुछ सदस्यों को एक ओवरब्रिज निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

इसके साथ हिन्दू धर्म के भगवान राम के बारे में उनकी विवादित टिप्पणी से देशभर में जमकर हंगामा मचा था। इसके साथ ही उनपर एलटीटीई के उपद्रवियों को आश्रय देने का भी आरोप है। बता दें कि एलटीटीई से जुड़े लोगों ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी थी।

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