पायलट से प्रधान मंत्री बने राजीव गांधी का रोचक सफर,बनें थे देश के सबसे युवा पीएम

New Delhi: राजीव गांधी भारत के 6 वें प्रधान मंत्री थे। आज उनका जन्मदिन है। स्व.राजीव गांधी की जयंती ‘सद्भावना दिवस’ और ‘अक्षय ऊर्जा दिवस’ के तौर पर मनाई जाती है। राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त, 1944 को मुंबई में हुआ था। राजीव गांधी की सरकार में हुए बदलाव आज भी याद किए जाते हैं। जिनमें संचार क्रांति और कम्प्यूटर क्रांति, शिक्षा का प्रसार, 18 साल के युवाओं को मताधिकार, पंचायती राज आदि शामिल हैं।

वे देश की कम्प्यूटर क्रांति के जनक के रूप में भी जाने जाते हैं। वे युवाओं के लोकप्रिय नेता थे। उनका भाषण सुनने के लिए लोग घंटों इंतज़ार किया करते थे। उन्होंने अपने प्रधानमंत्री काल में कई ऐसे महत्वपूर्ण फ़ैसले लिए जिसका असर देश के विकास में देखने को मिल रहा है। आज हर हाथ में दिखने वाला मोबाइल उन्हीं फ़ैसलों का नतीजा है।

40 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बनने वाले राजीव गांधी देश के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री थे। अपनी मां इंदिरा गांधी के मारे जाने के बाद 31 अक्टूबर 1984 को वे कांग्रेस अध्यक्ष बाद में देश के प्रधानमंत्री बने थे। राजीव गांधी राजनीति में नहीं आना चाहते थे इसीलिए वे सियासत में देर से आए। वे सिर्फ़ तीन साल के थे, जब देश आज़ाद हुआ और उनके नाना आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। राजीव का बचपन अपने नाना के साथ तीन मूर्ति हाउस में बिताया। राजीव की प्राथमिक शिक्षा आवासीय दून स्कूल में हुई थी। बाद में उनके छोटे भाई संजय गांधी को भी इसी स्कूल में भेजा गया, जहां दोनों साथ रहे। स्कूल से निकलने के बाद राजीव गांधी कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज गए, लेकिन जल्द ही वे वहां से हटकर लंदन के इम्पीरियल कॉलेज चले गए। उन्होंने वहां से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।

राजीव गांधी को जानने वाले बताते थे कि उनको संगीत में उनकी बहुत दिलचस्पी थी। उन्हें पश्चिमी और हिन्दुस्तानी शास्त्रीय और आधुनिक संगीत पसंद था। उन्हें फ़ोटोग्राफ़ी और रेडियो सुनने का भी ख़ासा शौक़ था। हवाई उड़ान उनका सबसे बड़ा जुनून था। इंग्लैंड से घर लौटने के बाद उन्होंने दिल्ली फ़्लाइंग क्लब की प्रवेश परीक्षा पास की और व्यावसायिक पायलट का लाइसेंस हासिल किया। इसके बाद वे 1968 में घरेलू राष्ट्रीय जहाज़ कंपनी इंडियन एयरलाइंस के पायलट बन गए।

कैम्ब्रिज में उनकी मुलाक़ात इतालवी सोनिया मैनो से हुई थी, जो उस वक़्त वहां अंग्रेज़ी की पढ़ाई कर रही थीं। उन्होंने 1968 में नई दिल्ली में शादी कर ली। वे अपने दोनों बच्चों राहुल और प्रियंका के साथ नई दिल्ली में इंदिरा गांधी के निवास पर रहते थे। वे खुशी-खुशी अपनी जिन्दगी गिजार रहे थे, लेकिन 23 जून 1980 को एक जहाज हादसे में भाई संजय गांधी की मौत ने सारे हालात बदल दिए। उन पर सियासत में आकर अपनी मां की मदद करने का दबाव बनने लगा। राजनीति में रूचि न होने के कारण पहले विरोध किया, लेकिन बाद में उन्हें अपनी मां की बात माननी पड़ी और इस तरह वे न चाहते हुए भी सियासत में आ गए।

उन्होंने जून 1981 में अपने भाई की मौत की वजह से खाली हुए उत्तरप्रदेश के अमेठी लोकसभा क्षेत्र का उपचुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें जीत हासिल हुई। अपने प्रधानमंत्री काल में राजीव गांधी ने नौकरशाही में सुधार लाने और देश की अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के लिए कारगर क़दम उठाए, लेकिन पंजाब और कश्मीर में अलगाववादी आंदोलन को नाकाम करने की उनकी कोशिश का बुरा असर हुआ। वे सियासत को भ्रष्टाचार से मुक्त करना चाहते थे, लेकिन यह विडंबना है कि बोफोर्स तोप रक्षा शौदे पर उन्हें भ्रष्टाचार की वजह से आलोचना का सामना करना पड़ा।

अपने शासन काल में उन्होंने कई साहसिक कदम उठाए, जिनमें श्रीलंका में शांति सेना का भेजा जाना, असम समझौता, पंजाब समझौता, मिज़ोरम समझौता आदि शामिल हैं। इसकी वजह से चरमपंथी उनके दुश्मन बन गए। साल 1989 में उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया, लेकिन वे कांग्रेस के नेता पद पर बने रहे। वे आगामी आम चुनाव के प्रचार के लिए 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेराम्बदूर गए, जहां एक आत्मघाती हमले में उनकी जान चली गई। 6 जुलाई 1991 उन्हें भारतरत्न से सम्मानित किया गया। आज़ाद भारत स्व. राजीव के महत्वपूर्ण योगदान के लिए हमेशा उनका ऋणी रहेगा।

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