कांग्रेस ने मजबूत उम्मीदवार को उतारकर मुकाबले को बनाया त्रिकोणीय, गठबंधन की बढ़ी मुश्किलें

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New Delhi: लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने यूपी में 11 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस के ये सभी उम्मीदवार अपने क्षेत्र में खास पकड़ रखते हैं। ऐसे में इन 11 सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है। ऐसे में सपा बसपा गठबंधन को नुकसान और बीजेपी को फायदा पहुंच सकता है।

लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने गुरुवार को यूपी से 11 प्रत्याशियों के नाम का ऐलान कर दिया हैं। इन 11 प्रत्याशी में से अधिकतर वही हैं जो 2009 और 2014 में चुनाव लड़ चुके हैं। कांग्रेस ने अपनी पहली सूची में मजबूत कैंडिडेट उतारकर गठबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जिसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है। इन 11 सीटों में से गठबंधन की तरफ से सपा को चार और बसपा को पांच सीटें मिली हैं।

मसलन कांग्रेस ने सहारनपुर, बदायूं और फर्रुखाबाद से मुस्लिम कैंडिडेट को उतारा है। सहारनपुर से इमरान मसूद बड़ा नाम हैं और वे निश्चित रूप से मुस्लिम वोटों का विभाजन करेंगे। गठबंधन में यह सीट बसपा के खाते में गई है। सहारनपुर में कुल 56.74 फीसदी हिंदू, 41.95 फीसदी मुस्लिम जनसंख्या है। 2014 के लोक सभा चुनाव में बीजेपी के राघव लखनपाल,जीते थे, उन्हें 472,999 मत हासिल हुए थे, जबकि कांग्रेस के इमरान मसूद 407,909 मतों के साथ दूसरे नंबर पर थे।

बदायूं से सलीम इकबाल शेरवानी इस बार कांग्रेस से ताल ठोक रहे हैं। सलीम इक़बाल ने 1996 में सपा के टिकट पर इस सीट से चुनाव जीता और इसके बाद यह सपा की परम्परागत सीटों में शामिल हो गई। सलीम इकबाल ने लगातार चार बार यहां से चुनावी परचम लहराया। 2009 में इस सीट पर यादव परिवार की एंट्री हुई और मुलायम सिंह के भतीजे धर्मेंद्र यादव ने जीत दर्ज की। पिछले चुनाव में भी उन्होंने आसानी से बीजेपी के प्रत्याशी को मात दी।

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फर्रुखाबाद से पूर्व कैबिनेट मंत्री सलमान खुर्शीद के मैदान में होने से मुकाबला दिलचस्प नजर आ रहा है। 2009 में सलमान खुर्शीद इस सीट से विजयी रहे थे। हालांकि 2014 में बीजेपी के मुकेश राजपूत ने इस सीट पर जीत दर्ज की। सलमान खुर्शीद चौथे स्थान पर रहे थे और उन्हें 95,543 वोट हासिल हुआ था। इनके अलावा कुशीनगर से पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह मैदान में हैं। रजवाड़े से ताल्लुक रखने वाले आरपीएन सिंह पिछली बार के सांसद थे लेकिन इस बार वह जीत नहीं सके।

उन्नाव से अनु टंडन को कांग्रेस ने मैदान में उतारा है। आजादी के बाद से 2014 तक उन्नाव संसदीय सीट पर 16 बार आम चुनाव और एक बार उपचुनाव हुए हैं। इनमें से कांग्रेस 9 बार जीतने में सफल रही जबकि चार बार बीजेपी जीत चुकी है और सपा, बसपा और जनता पार्टी एक-एक बार जीतने में सफल रही हैं। फ़ैजाबाद से निर्मल खत्री मैदान में हैं। यूपी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष निर्मल खत्री इस सीट से 2009 में चुनाव जीते थे। 2014 के मोदी लहर में बीजेपी के लल्लू सिंह जीते और खत्री चौथे नंबर पर रहे।

जितिन प्रसाद को कांग्रेस ने मैदान में उतारा है। 2009 में यहां पहली बार चुनाव हुए तो कांग्रेस नेता जितेंद्र प्रसाद के बेटे जितिन प्रसाद चुनाव जीते थे। जितिन प्रसाद शाहजहांपुर से चुनाव जीत कर यहां आए थे और पहले ही चुनाव में जबरदस्त जीत हासिल की। लेकिन 2014 में चली मोदी लहर में उनका पत्ता पूरी तरह से साफ हो गया।

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